तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
पृष्ठ 65, कुल 174 में से
संदर्भ में पढ़ेंतरुणके स्वप्न
ही भगाते नहीं हैं। पांच तरहकी चीज न सीखकर यदि
“रट्टू” पढ़ाई ही पढ़ाई जाय तो बालक लिखने पढ़नेसे
दूर भगाता है और उसकी बुद्धि विकसित नहीं होती।
बालककी आंखें, नाक, कान, हाथ यदि उपयोग और
जाननेकी चीज पायेंगे तो ये सब इन्द्रियां सजग हो
जायंगी, जिसके फलस्वरूप उसकी बुद्धि और मन जाग-
रित होगा और सब तरहका ज्ञान पानेके कारण लिखने
पढ़नेमें उसका मन लगेगा। Manual traning के बिना
शिक्षाकी जड़में मट्ठा पड़ जाता है। अपने हाथसे कोई
चीज बनानेमें जो आनन्द मिलता है वैसा आनन्द पृथ्वी-
पर कम ही है। सर्जन करनेमें गम्भीर आनन्द निहित है।
इसी joy of creation का, बच्चे अपने हाथसे जब
कोई चीज तैयार करते हैं, तब अनुभव करते हैं। चाहे बगीचेमें
पेड़ पौधे लगाकर या मिट्टीके खिलौने बनाकर यानी
किसी भी नयी चीजको बनाकर बच्चे परम प्रसन्न होते
हैं। बच्चे छोटी उम्रमें ही इस तरहका आनन्द प्राप्त कर
सकें ऐसी व्यवस्था होना चाहिये। इसी प्रकार उनकी
Originality या व्यक्तित्वका विकास होगा। वे लिखने
पढ़नेसे न डरकर उसका आनन्द उठाना सीखेंगे। विला-
यतके अधिकांश स्कूलोंमें बच्चे बागवानी, व्यायाम, ड्रिल
६४