तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतरहका बाजा सिखाना हो तो, छात्र यदि बांसुरीको
देखे, छुए, बजाकर उसकी आवाज कानसे सुने तो
बांसुरी बजाना बहुत शीघ्र जान जायगा। क्योंकि दृष्टि-
शक्ति, श्रवण शक्ति, स्पर्श शक्तिको उसने एक साथ
काममें लगाया। गोदका बच्चा कोई चीज देखते ही उसे छूना
चाहता है, खाना चाहता है, उसका कारण यही है कि
बालक सब इन्द्रियोंसे बाहरका ज्ञान प्राप्त करना चाहता
है। इसलिये प्रकृतिके नियमके अनुसार यदि सब इन्द्रियों-
से ज्ञान प्राप्त करनेका प्रयत्न किया जाय तो बहुत ही
शीघ्र फल मिलेगा। गणित मुखस्थ न कराकर यदि हम
छात्रको ईंट पत्थर या काठके टुकड़ोंसे उसे इस विषय-
की शिक्षा दें तो वह आसानीसे समझ सकता है।
और एक बात है, मानसिक शिक्षाके साथ ही साथ
शिल्प शिक्षाकी व्यवस्था भी होना चाहिये। खिलौने
बनाना, मिट्टीसे मानचित्र बनाना, तसवीर बनाना, रंगों-
का व्यवहार करना, गाना सिखाना आदिकी व्यवस्था
भी होना चाहिये। इससे शिक्षा सर्वांग पूर्ण होगी
यह नहीं बल्कि लिखने पढ़नेमे भी विशेष उन्नति होगी।
पांच तरहकी चीजें सिखानेसे बालकोंकी बुद्धि बढ़ती है,
लिखने पढ़नेमें मन लगता है और वे पढ़नेका नाम सुनते
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