तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
पृष्ठ 63, कुल 174 में से
संदर्भ में पढ़ेंतरुणके स्वप्न
अनुसार पन्द्रह मिनट भी व्यायाममें खर्च करे तो यथेष्ट
हैं और पन्द्रह मिनट ध्यान चिन्तामें लगावे तो कुल आधा
घण्टा हुआ। एक घण्टा पढ़नेके लिये रखा जाय तो कुल
डेढ़ घण्टा हुआ, इसमें रोजाना अखबार पढ़ना शामिल
नहीं है। फिर जितना ज्यादा समय दे सको, उतना ही
लाभ होगा। हर एकको अपनी सुविधाके अनुसार डेढ़
घण्टा निकाल लेना होगा। ध्यान धारणाके सम्बन्धमें
पिछले पत्रमें कुछ लिखा है, इसीलिये इस पत्रमें नहीं
लिख रहा हूं। मैं पुस्तकोंकी तालिका दे रहा हूं। ये
किताबें सालभर पढ़नेके लिये काफी हैं।*
प्राथमिक शिक्षा और उच्च शिक्षाका एक बड़ा फर्क
यही है कि प्राथमिक शिक्षामें facts का परिचय रहता
है और उच्च शिक्षामें उसके साथ विश्लेषण और व्याख्या
जुड़ जाती है। प्राथमिक शिक्षामें ऐन्द्रिक शक्तिपर
विशेष निर्भर रहना पड़ता है। उच्च शिक्षामें ऐसी बातें
सिखलायी जाती हैं जिसे छात्र देख नहीं पर समझ सकता
है। और एक बात है सिखानेके समय इन्द्रियकी सहा-
यता जितनी अधिक ली जायगी, सीखनेवालेको सीखने-
में उतनी ही आसानी होगी। जैसे-बांसुरी या इसी
- मूल पुस्तकमें कुछ बंगला पुस्तकोंका उल्लेख है।
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