तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
पृष्ठ 60, कुल 174 में से
संदर्भ में पढ़ेंचरित्र गठन और मानसिक उन्नति
साधनासे एक तरफ शत्रुओंका नाश दूसरी तरफ
सद्वृत्तियोंका विकास होता है। रिपुओंके नाशके साथ
ही साथ हृदय दिव्य भावसे पूर्ण हो उठता है। तथा
जैसे ही दिव्य भाव हृदयमें प्रवेश करते हैं, दुर्बलताएं
भाग जाती हैं।
रोज (संभव हो तो) इसी प्रकार ध्यान करना।
कुछ दिन अभ्यास करनेके बाद हृदयको शक्ति मिलेगी,
शान्तिभी अनुभव करोगे। स्वामी विवेकानन्दकी किताबें
पढ़ सकते हो, उनके पत्र और व्याख्यान सब कुछ मिलेंगे।
“पत्रावलि” और व्याख्यान पढ़े बिना और किताबें पढ़ना
ठीक नहीं। Philosophy of Relegion, jnan yoga” इस
तरहकी किताबें पहले मत पढ़ना। इसके बाद साथ-साथ
“श्री श्री रामकृष्ण कथामृत” पढ़ सकते हो। रवि बाबूकी
अनेक कविताओंमें काफी inspiration मिलेगा। डी०
एल राय की, मेवाड़ पतन, दुर्गादास आदि किताबें पढ़ने-
से शक्ति मिलती है। बंकिमबाबू और रमेशदत्तके ऐति-
हासिक उपन्यास खूब शिक्षाप्रद हैं। नवीनसेनका ‘पलासी-
का युद्ध’ पढ़ सकते हो। शिखेर बलिदान, शायद श्रीमती
कुमुदनी वसुकी लिखी हुई अच्छी किताब है। Victor
Hugo का Les Mesrables संभवतः पुस्तकालयमें होगी,
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