तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतरुणके स्वप्न
का अधिक ध्यान करता है, वैसा ही हो जाता है। जो
अपनेको दुर्बल और पापी समझता है वह दुर्बल हो जाता
है। जो हमेशा अपनेको पवित्र और शक्तिमान अनुभव
करता है वह शक्तिमान और पवित्र हो जाता है। कहा
भी है, "यादृशी भावना यस्य सिद्धिर्भवति तादृशी।"
भय जय करनेका उपाय शक्ति-साधना है। दुर्गा,
काली आदि मूर्ति शक्तिका रूप विशेष है। शक्तिके किसी
भी रूपकी मनमें कल्पना करने और उससे शक्ति पानेकी
प्रार्थना करने, उसके चरणोंमें मनकी सम्पूर्ण मलिनता
और दुर्बलता बलिदान करनेसे मनुष्य शक्ति-लाभ कर
सकता है। हमारे अन्दर अनन्त शक्ति निहित है। उसी
शक्तिको जगाना होगा। पूजाका उद्देश्य है मनमें शक्ति-
को जगाना। हर एकको शक्तिका ध्यान कर पांचों
इन्द्रियों तथा काम आदि रिपुओंका उसके चरणोंपर
बलिदान करना चाहिये। पंच प्रदीपका अर्थ है पांचों
इन्द्रियां। पांचों इन्द्रियोंकी सहायतासे माकी पूजा होती
है। हमारे आंखें हैं इसीलिये हम रूपकी कल्पना करते हैं,
नाक है इसलिये धूपादि सुगन्धित द्रव्य जलाते हैं आदि।
बलिका अर्थ है, कामादि रिपुओंकी बलि करना। बकरा
कामका ही रूप विशेष है।
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