तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतरुणके स्वप्न
राजनीति का स्रोत क्रमशः जिस प्रकार पंकिल होता
जा रहा है उससे मनमें यही होता है कि कुछ समय तक
राजनीतिसे देशका विशेष उपकार नहीं हो सकता।
सत्य और त्याग—ये दो आदर्श राजनीतिसे जितने ही दूर
होते जाते हैं राजनीतिकी कार्यकारिताका उतना ही ह्रास
होता जाता है। राजनैतिक आन्दोलन नदीके स्रोतकी तरह
कभी स्वच्छ, कभी पंकिल, सभी देशोंमें हो जाता है।
बङ्गालमें राजनीतिकी अवस्था जैसी भी हो, तुम उस तरफ
ध्यान न देकर सेवा कार्यमें अग्रसर होते जाओ।
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तुम्हारे मनकी वर्तमान असन्तोष पूर्ण अवस्थाका
कारण क्या है, यह तुम समझ सके हो या नहीं, मालूम
नहीं, पर मैं समझ सका हूं। सिर्फ कामसे मनुष्यका
आत्म-विकास सम्भव नहीं हो सकता। बाहरी कामके
साथ लिखने-पढ़ने और ध्यान धारणाकी भी जरूरत है।
कामसे जैसे बाहरकी उच्छृंखलता नष्ट हो जाती है और
मनुष्य संयत हो जाता है, उसी प्रकार लिखने-पढ़ने और
ध्यान-धारणासे internal discipline, यानी आन्तरिक
संयम प्रतिष्ठित होता है।
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