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तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 56, कुल 174 में से

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पृष्ठ 56

चरित्र गठन और मानसिक उन्नति
(दक्षिण कलकत्ता सेवक समितिके श्री हरिचरण
बागचीको लिखे गये पत्रका अंश)
माण्डला जेल
तुमने जो लिखा ठीक है, वास्तविक कार्यकर्त्ताका
बड़ा अभाव है। तब भी जैसा उपादान मिलता है उसे
लेकर ही काम चलाना पड़ता है। जीवन न देनेसे जैसे
जीवन नहीं पाया जाता, प्रेम किये बिना प्रतिदानमें जैसे
प्रेम नहीं मिलता, वैसे ही स्वयं आदमी बने बिना आदमी-
को “आदमी” नहीं बनाया जा सकता।
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