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तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 52, कुल 174 में से

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समाज-सेवा और गृह-शिल्प
यदि कोई सहायता लेकर भी बदलेमें काम करना न चाहे,
तो उसकी सहायता बन्द कर देना अच्छा है। पर इसके
पहले दो एक बातोंपर विचार करना जरूरी है।
( १ ) जो सहायता लेता है उसे काम करनेकी फुर्सत
होना चाहिये। यानी यदि कोई विधवा सहायता लेती
हो और उसे गृहस्थीके कामोंसे अवकाश न मिलता हो तो
उससे काम करनेकी जिद्द करना बेकार है। हमे देखना
चाहिये कि सहायता पाकर कोई आलस्यमें समय तो
नहीं बिता रहा है। इसलिये जांच पड़ताल करना आव-
श्यक है। समय और शक्ति रहनेपर भी जो काम नहीं
करते उनकी सहायता बन्द कर देना चाहिये।
( २ ) जिनमें शारीरिक बल नहीं है तथा जिनके यहां
कोई काम करनेवाला आदमी न हो, उनसे काम करानेके
लिये जिद न करना चाहिये।
( ३ ) काम करानेमें vartiey of choice होना
चाहिये, क्योंकि सबसे सब काम नहीं हो सकते। पहले
सहज काम करवाना चाहिये, फिर जरा मुश्किल काम
सिखाना चाहिये ।
( ४ ) जिनसे काम लेना हो उन्हें काम भी सिखाना
चाहिये। अनेक काम ऐसे हैं जिन्हें आदमी जबतक
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