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तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 50, कुल 174 में से

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समाज-सेवा और गृह-शिल्प

गृह-शिल्प चलाना चाहते हों तो एक काम आवश्यक
है। किसी युवकको कासिमबाजार polytechnic या
इसी तरहकी दूसरी संस्थामे काम सीखनेकेलिये भेजना
होगा। कासिमबाजार स्कूलमें मिट्टीके खिलौने और देव-
देवियोंकी मूर्तियां बहुत अच्छी तैयार होती हैं। सहायता
चाहनेवालोंको ऐसे काममें लगाया जा सके तो उनके
द्वारा तैयार माल बङ्गाल भरमें बिक सकता है। यहांपर
एक शिल्प और भी प्रचलित है, रङ्गीन कागजोंसे फूल,
पेड़, पत्तियां, गुलदस्ते, चीनी लालटेन आदि बनाना। ये
चीजें इतनी सुन्दर होती हैं कि देखनेपर एकाएक मनमें
यह बात नहीं उठती कि ये चीजें असली नहीं, बल्कि
कागजकी हैं। भले घरोंके छोटे बच्चे यह काम कर सकते
हैं, यह बिलकुल आसान है।
ढाका जिलेमे कुटीर शिल्पके ढङ्गपर बटन तैयार होते
हैं, वहां घर घरमें यह काम होता है, किसी आदमीको
वहां यह सब देखनेकेलिये भेजा जा सकता है।
स्वास्थ्य विषयक व्याख्यान और मेजिक लालटेनके
प्रदर्शनकी व्यवस्था भवानीपुरकी तरफ करना अच्छा
होगा। जहां गरीब रहते है वहां व्याख्यानकी सख्त जरू-
रत है, यदि सम्भव हो तो मेजिक लालटेन आदि खरीदने
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