तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतरुणके स्वप्न
गरीब भले गृहस्थों द्वारा यह काम चल सकता है। माल
तैयार होकर आते ही उसका दाम या मजदूरी चुका देना
पड़ेगा और मालको न बिकनेतक भण्डारमें रखना होगा।
समितिको एक और काममें हाथ लगाना चाहिये।
कलकत्ते में प्रेसीडेन्सी और अलीपुर दो जेल हैं। जेलके
अस्पतालमें यदि कोई हिन्दू मर जाय और उसके सम्बन्धी
कलकत्तेमे न हों तो उसकी दाह क्रिया उचित रूपसे नहीं
होती,—डोम या मेहतरको पैसे देकर यह काम कराया
जाता है। इस कामकेलिये मुसलमानोंका Burial
Association है, जो मुसलमान कैदीके मरनेकी खबर पाते
ही उचित व्यवस्था करता है। मृत हिन्दू कैदियोंकेलिये
एक ऐसा organization चाहिये। सेवक समिति क्या
इस कार्यका भार ले सकती है ? यदि आपकी राय हो तो
बसन्त बाबूकी मार्फत जेल सुपरिण्टेण्डेण्टको पत्र लिखा
जा सकता है कि सेवक समिति इस कार्यका भार लेनेके
लिये तैयार है। आप यदि इस सम्बन्धमे कोई व्यवस्था न
कर सके तो मैं जेलसे आनेपर इस सम्बन्धमें विशेष
प्रयत्न करूंगा। आदमी न होनेपर मैंने खुद कई बार यह
काम किया है। ऐसे काममें स्वयंसेवक बननेकेलिये मैं
हमेशा तैयार हूं।
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