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तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 48, कुल 174 में से

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पृष्ठ 48

आदमी मिल सकेगा क्या ? बाजारमें बेचनेकेलिये इन
चीजोंका बहुत उत्तम होना जरूरी है । यदि अच्छी चीज
तैयार होनेकी संभावना हो तो इसका experiment
किया जा सकता है । Raw materials देकर आप
तैयारी माल ले सकते हैं, बिक्रीकी जिम्मेदारी आपकी
रहेगी । या वे खुद ही raw materials संग्रह कर माल
तैयार कर आपके पास आकर बेच जा सकती हैं। काम
शुरू करनेसे पहले दूकानदारसे बातचीत करना जरूरी है
कि वे हमारा माल लेंगे या नहीं। Raw materials अच्छा
होनेसे माल अच्छा बनेगा,पर इसमें चोरीकी भी सम्भावना
है। जो ये काम करेंगी वे गरीब होंगी,फिर वे आम, नींबू,
तेल, मिर्च आदि पानेपर उन्हें अपने उपयोगमें लानेके
लिये नहीं ललचायंगी, यह कौन कह सकता है ? फिर
यदि वे खुद raw materials लेंगी तो तेल वगैरह सस्ता
ले सकती हैं और फलस्वरूप चीज बढ़िया तैयार न
होगी। इस सम्बन्धमें आप दोनों तरफकी बातें सोच
समझ कर ही कुछ निर्णय करें। इसके सिवा यह जानना
भी जरूरी है कि बाजारमें इन सब चीजोंके खरीद्दार
कैसे हैं? मेरा ख्याल है कि conscientious recipients
नहीं मिलनेपर इस काममें सफलता नहीं मिल सकती ।

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