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तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 47, कुल 174 में से

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पृष्ठ 47

तरुणके स्वप्न
अभी भी तैयार हों तो रूईकी खेतीमें पहले पहले अधिक
खर्च नहीं पड़ेगा। दो एक मालियोंके वेतन और बीजोंके
दाम लायक रुपयोंका प्रबन्ध करनेसे साल भरमें ही हमें
उसका फल मिल जायगा। कृषि विभाग ( Agricul
tural Department ) से यह जान लेना होगा कि किस
जातिकी रूईके बीज बोने चाहिये। जिन गृहशिल्पोंका
श्रीगणेश कर चुके हैं,उनमें यदि नुकसान न हो,थोड़ा लाभ
भी हो तो चलाते रहियेगा। फिर अधिक लाभका काम
चल जानेपर यह काम बन्द किया जायगा। इस समय
जो शरणागत हैं उनसे कुछ न कुछ काम अवश्य कराना
चाहिये। भीख मांगना छोड़कर जब वे काम करने लगेंगे
तब उन्हें लाभ जनक व्यवसायमें लगा देनेसे बहुत उत्तम
फल मिलेगा। फिलहाल 'गृहशिल्पमें आर्थिक लाभ न भी
हो तो काम करनेकी तरफ रुचि और dignity of la-
bour की भावना जगाने और बढ़ानेसे समाजका बड़ा
लाभ होगा। कुटीर शिल्पके सम्बन्धमें यदि आप श्री
मदनमोहन बर्मनसे मिलें तो बड़ा अच्छा हो।
बड़ी, आचार, चटनी आदि तैयार हों तो ये चीजें
भी चल सकती हैं। स्त्रियां, विशेषकर विधवाएं यह काम
आसानीसे कर सकती हैं। किन्तु ये काम सिखानेवाला
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