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तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 46, कुल 174 में से

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समाज-सेवा और गृह-शिल्प
की जरूरत है उन्हीसे यह काम शुरू करवाना चाहिये,
किन्तु काम चल निकलनेपर गरीब गृहस्थ अपनी आय
बढ़ानेके लिये यह काम खुद ही करने लगेंगे। समिति
सस्ते भावमे raw materials दे और तैयार माल बेचने-
का प्रबन्ध करे। यह काम शुरू करनेपर पहले इसमें काफी
समय लगाना होगा। इति—
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माण्डला जेल
आपने पहले जो कागजात भेजे थे, वे सब मिल गये
थे। कल पुस्तकालयका सूचीपत्र आदि मिला। समिति-
का कार्य दिनों दिन बढ़ रहा है, उससे मैं कितना आन-
न्दित हूं, यह लिख नही सकता।
* * *
आप लोगोंने खर्चा बाद देकर इतने रुपये जमा कर
लिये यह जानकर सुखी हुआ। चरखा, सूता आदिके
विषयमे आपने जो कुछ लिखा है, उससे मैं सहमत हूं।
तब भी अभीसे कोशिश बन्द नही करना चाहिये। आपने
पहले एक पत्रमें लिखा था कि रूईकी खेतीकेलिये एक
महाशय अस्सी बीघा जमीन देनेको तैयार हैं, वे महाशय
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