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तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 45, कुल 174 में से

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तरुणके स्वप्न
वहां जाकर कुछ ही दिनोंमें सीखकर आ सकता है।
इसमें खर्च भी कुछ न बढ़ेगा और जब यह काम शुरू
किया जायगा, तब सिर्फ रंगोंमें कुछ खर्च करना पड़ेगा,
इसके सिवा और खर्च बहुत कम होगा। सौ बातकी
एक बात यह है कि एक आदमीको इसीके पीछे हाथ
धोकर पड़ जाना होगा, He must become mad
over it.
और एक बात बार बार मेरे मनमें आती है, सम्भव
है पहले भी इस विषयमें लिख चुका हूं, बटन तैयार करने
के सम्बन्धमें। ढाका जिलेमें अनेक गांवोंमें यह काम
होता है। गरीब गृहस्थ अपने फुरसतके समय यही काम
करते रहते हैं। एक आदमीको बहुत शीघ्र ही यह काम
सिखाया जा सकता है। अथवा एक ऐसे आदमीको
नियुक्त किया जा सकता है जो यह काम जानता हो और
सिखा सकता हो।
अखबारमें विज्ञापन देनेसे ऐसा आदमी मिल सकता
है। मेरा ख्याल है कि पत्थरपर घिसकर बटन तैयार किये
जा सकते हैं। छेद करने और गोल काटनेके लिये यंत्रकी
जरूरत पड़ेगी। कुछ यंत्र और एक बोरा सीप और घोंघा
से ही काम शुरू किया जा सकता है। जिनको सहायता-
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