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तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

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समाज-सेवा और गृह-शिल्प
कुटीर-शिल्पके लिये बहुत बड़ी रकम चाहिये, ऐसा मेरा
विश्वास नहीं है। सबसे पहले जरूरी यह है कि सभाका
एक सदस्य ऐसा होना चाहिये जो सिर्फ इसी विषयमें
दिलचस्पी रखे, इस विषयकी सब बातें जाने और पुस्त-
कादि पढ़े तथा जहां कुटीर-शिल्प चलनेकी जरा भी
सम्भावना हो वहां जाकर अपनी आंखोंसे सब कुछ
देखे सुने। जब काम चलानेका निश्चय हो जाय तब
जिसके जिम्मे काम चलानेका भार हो उसे पहलेसे उस
कामकी शिक्षाके लिये उपयुक्त स्थानपर भेजकर शिक्षा
दिलवाना चाहिये। पहलेसे ही Polytechnic Institute
में भेजनेका प्रयोजन नहीं है। Electroplating का काम
सिखानेकी जरूरत नहीं है। क्योंकि सिलाईका काम अपने
यहां सिखाया ही जाता है और Electroplating सिखाने
से कोई फायदा नहीं होगा। मुझे जहांतक याद है, मैं एक
बार वहां गया हूं। Polytechnic के सब कामोंमें वेतका
सामान बनाने और मिट्टीके खिलौने आदि बनानेका काम
गृह-शिल्पके ढङ्गपर चलाया जा सकता है। इसमें भी वेतके
कामके बारेमें मुझे सन्देह है कि स्त्रियोंसे यह काम कर-
वाया जा सकेगा या नहीं ? अब यदि मिट्टीके खिलौने आ-
दिका काम चलानेका विचार हो तो कोई भी एक आदमी
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