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तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

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तरुणके स्वप्न
एक चिरंतन सत्य है” इस उक्तिकी सत्यता यदि यहां एक
साल नहीं रहता तो इस प्रकार थोड़े ही समझ पाता ।
बङ्गालके शस्य श्यामल मनोहर क्षेत्र, मधुगन्ध-वह मुक-
लित आम्र कानन, आरति धूप धूमाच्छादित मन्दिर,
फलकवत् गाम्य कुटीर, मेरी आँखोंके सामने नाचता
रहता है। ओह ! ये सब दृश्य कल्पनामें भी कितने
सुन्दर हैं।
सवेरे या दोपहरको जब मेघोंके टुकड़े, आंखोंके
सामने आ आ कर चले जाते हैं, तब मनमें होता है कि
विरहीयक्षकी तरह मैं भी अपने अन्तरतम प्रदेशका सन्देश
वंग माताओंके चरणोंमें निवेदन करूं,-भेज दूं । आखिर
वैष्णवोंकी भाषामें लिख भेजता हूं।
“तोमारेई लागिया कोलंकेर बोझा,
बोहिते आमार सुख।”
सायंकालके बढ़ते हुए अन्धकारके आक्रमणसे जब
मार्त्तण्ड माण्डलेके दुर्गकी प्राचीरोंके पीछे छिप जाता है,
अस्तोन्मुख सूर्यकी सुनहली किरणोंसे जब पश्चिम
प्रदेश रञ्जित हो जाता है और उसी समय जब असंख्य
रिक्तमेघ सूर्यकी लाल किरणोंसे रूप बदलकर लाल-लाल
दखलायी पड़ते हैं,उस समय बङ्गालके सुहावने सूर्यास्तकी
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