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तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 38, कुल 174 में से

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पृष्ठ 38

मेरा देश
याद आती है। इस काल्पनिक दृश्यमें भी इतना
सौन्दर्य यह पहले नहीं जानता था।
प्रातःकालकी विचित्र वर्णच्छटा जब पूर्वाकाशको रंजित
करती है, तब निद्रालस नयनोंकी पलकोंपर आघात करके
कोई कहता है, "अन्धे जागो।" उस समय और भी एक
सूर्योदयका स्मरण होता है, जिस सूर्योदयमें कवि और
साधकोंने मांका दर्शन पाया है।
जाने दो—शायद मैं pedantic हुआ जा रहा हूं।
किन्तु यह pedantry नहीं, वाचालता है। भावोंका
आदानप्रदान बन्द होनेपर, फिर एकाएक सुयोग मिलने-
पर जो होता है,उसीका एक दृष्टान्त है। Engine समय-
समयपर जैसे अपनी स्टीम बाहर छोड़कर आत्मरक्षा
करता है, बस, ऐसी ही मेरी अवस्था है।
सेवक समितिका काम सुचारु रूपसे चल रहा है,
सुनकर सुखी हुआ। Lansdowne ब्रांचके साथ किसी
तरहका मनोमालिन्य न होना चाहिये। आशा है, वे लोग
कामकाज ठीक चला रहे होंगे। दक्षिण कलकत्ता सेवाश्रम
के Orphanage के लिये कुछ करें तो बड़ा अच्छा होगा।
इसकी विशेष उन्नति नहीं हो रही है, किन्तु यह काम
बहुत जरूरी है।
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