तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतरुणके स्वप्न
वाणी देंगे तो वे सब बातें देशवासियोंको सुनाऊंगा।
जेलमें हूं, इससे दुखी नहीं हूं। देशमाताके लिये कष्ट
सहना गौरवकी बात है। Suffering में आनन्द है
इसे विश्वास करिये। अगर ऐसा न होता तो आदमी
पागल हो जाता, ऐसा न होता तो यातनाओंके बीचमें
मनुष्यका हृदय आनन्दसे भरकर हंसता कैसे ? जो
वस्तु बाहरसे suffering मालूम पड़ती है, भीतरसे देख-
नेसे वही आनन्दमय मालूम होती है। निश्चय ही वर्षके
३६५ दिन और दिनके २४ घण्टोंमें हमेशा ही यह भाव मेरे
हृदयमें नहीं रहता, क्योंकि अभी भी हाथोंपर बेड़ियोंके
दाग हैं। किन्तु यह सच है कि उपरोक्त अनुभूति कम या
ज्यादा जिसके हृदयमें नहीं है, वह suffering से जीवन-
को बल-युक्त नहीं कर सकता और suffering के बीचमें
प्रकृतिस्थ नहीं रह सकता।
मुझे दुख इस बातका है कि इन चौदह महीनोंका
बहुत-सा समय योंही बिता दिया। अगर बङ्गालकी जेल-
में होता तो साधनाके पथमें बहुत कुछ आगे बढ़ पाता।
किन्तु यह तो होनेको न था। अब इस समय मेरी प्रार्थना
यही है कि जिसके हाथमें पताका दो उसके हाथमें उसे
धारण करनेकी शक्ति दो। जिस समय यहांसे छुटकारेकी
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