सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 34, कुल 174 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 34

मेरा देश
भी Alexander Selkirk की भाषामें कहना होगा, बीच
बीचमें मेरे भी मनमें होता है;—
“My friends do they now and then
Send a wish or a thought after me.”
आज पूरे चौदह महीने मुझे जेलमें हुए। इनमें ग्यारह
महिने बर्मामें काटे। समय समयपर मनमें होता है लम्बे
चौदह महिने देखते-देखते चले गये, किन्तु कभी मनमें
आता है कि न जाने कितने युगसे यहां हूं। जेल ही मानो
घर द्वार है, यहांसे बाहरकी बात मानो स्वप्नकी बात है,
मानो यहांका एकमात्र सत्य—वास्तविकता, लोहेकी
गारद और प्रस्तर प्राचीर है। सचमुच यह एक विचित्र
दुनिया है। रह रहकर मनमें सोचता हूं, जिसने जेलखाना
नहीं देखा उसने दुनियाका कुछ भी नहीं देखा। उसके
सामने दुनियाकी बहुत-सी सचाई नहीं आयी।
मैं अपने मनका विश्लेषण कर समझ पाता हूं कि ऐसे
विचार ईर्ष्याके कारण नहीं उठते। वस्तुतः जेलमें आकर
बहुत कुछ सीखा हू। बहुत कुछ सत्य जो एक समय छाया
के समान था, यहां वहो स्पष्ट हो गया है। तथा अनेक
नवीन गम्भीर अनुभूतियोंने मेरे जीवनको सबल और
गम्भीर बनाया है। यदि भगवान किसी दिन सुयोग और
३ ३३