तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
पृष्ठ 33, कुल 174 में से
संदर्भ में पढ़ेंतरुणके स्वप्न
राजबन्दीके साथ सम्बन्ध रखना वांछनीय नहीं समझा
जाता। किन्तु आप पत्रोत्तरकी प्रतीक्षा करते होंगे और
उत्तर पाकर सन्तुष्ट होंगे, यही समझ कर उत्तर देने
बैठा हूं।
आपने सामूहिक रूपसे मुझे याद किया, मेरे स्वास्थ्य-
के लिये शुभ कामना की, मेरी रिहाईकी कामनाकी तथा
मेरे प्रति अपने हृदयका प्रेम प्रदर्शित किया, इसके लिये
मेरी आन्तरिक कृतज्ञता स्वीकार कीजिये। स्वदेश सेवक
इससे बढ़कर और क्या पारितोषिक चाह सकता है?
आपका पत्र पाकर और अखबारमें आपकी सभाका
विवरण पढ़कर मैं आनन्दित हुआ, यह कहना न होगा।
तब भी मैं समझता हूं इस तरहका आनन्द उपभोग करना,
मनकी सर्वोच्चता प्रकट नहीं करता। क्या करूं? स्वदेश
सेवी होनेकी स्पर्द्धा रखनेपर भी मैं मनुष्य हूं। अपनत्व
और ममताका निदर्शन पाकर कौन सुखी नहीं होता ?
प्रेम और ममता पानेकी आकांक्षा पर विजय पा लेना या
उससे आगे बढ़ जाना बहुत अच्छा है, तथा उच्च स्वदेश
सेवीके लिये हर तरहके प्रतिफलकी आकांक्षा पर विजय
प्राप्त कर लेना उचित है किन्तु यह अवस्था अभीतक मेरे
लिये आदर्शही है। हृदयपर हाथ रखकर बोलते समय मुझे
३२