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तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 28, कुल 174 में से

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पृष्ठ 28

सौ बातकी एक बात
साहित्यिक, वैज्ञानिक नेता हुए। उनमें अनेक अपना
कर्तव्य पूरा कर देशवासियोंको रुला स्वर्ग सिधार गये।
उनके रिक्त स्थान अभीतक खाली पड़े हैं, यह कुछ कम
लज्जाकी बात नहीं है। बंगालीको यदि बचे रहना है तो
उसे ऐसे मनुष्योंका सर्जन करना होगा जो इन रिक्त
स्थानोंका अधिकांश पूरा कर सकें। जो जाति वस्तुतः
जीवित है, उस जातिमे ऐसे महत्वपूर्ण स्थान इस प्रकार
शून्य नहीं पड़े रहते। महापुरुषोंके स्वर्गवासके बाद अन्य
मनीषि उन स्थानोंको भर देते हैं। जो जाति एकमन होकर
जीवनके विभिन्न क्षेत्रोकी साधनामे लगी रहती है उस
जातिमें किसी भी तरफ उपयुक्त मनुष्यका अभाव नहीं
होता। बंगालकी साधना अभी पूर्ण और सर्वांग सुन्दर
नहीं हुई, इसीलिये किसी महापुरुषके जानेके बाद उनके
रिक्त स्थानकी पूर्ति नहीं होती। सर्वांग सम्पन्न जातिका
आदर्श सामने रखकर जातीय साधनामें प्रवृत्त न होनेसे
वह साधना कभी भी विजय युक्त और साफल्य मण्डित
नहीं होती। राष्ट्रीय जीवनके अनेक क्षेत्र हैं, सभी क्षेत्रोंमें
जातिको पूर्ण करना होगा। जब जाग्रतिकी बाढ़ आयगी,
तब वह जीवनके सभी क्षेत्रोंपर अधिकार कर लेगी।
तरुण बङ्गालको स्वावलम्बी होना होगा, बाहिरी शक्ति-
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