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तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 27, कुल 174 में से

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पृष्ठ 27

तरुणके स्वप्न
दायित्व समझनेकी चेष्टा कर रहे हैं, यह मामूली
बात नहीं है। मेरा यही कहना है कि यदि तलाश
करनेपर भी नेता न मिलेगा तो क्या तुम चुप बैठे
रह सकोगे ? तुम लोग ही नेता बनाकर काममे लग
जाओ। नेता आकाशसे नहीं गिरता, काम करते करते
ही नेता हो उठता है। अब “कःपंथा” कहकर बैठे रहनेसे
काम नहीं चलेगा। अपनी विवेक-बुद्धिके प्रकाशमें तुम
अपना रास्ता खुद ही खोज लो। तुम समस्याको जितना
जटिल समझते हो उतनी नहीं है। हम लोगोंका आदर्श
यही है कि हम एक सर्वाङ्ग सुन्दर जाति बनाना चाहते हैं
जो जाति ज्ञान और कर्ममें, शिक्षा और धर्ममें संसारकी
सर्वश्रेष्ठ स्वाधीन जातिके बराबर खड़ी हो सके। इसी-
लिये राष्ट्रीय जीवनके प्रत्येक क्षेत्रमें जागरण लाना
होगा। किसी भी तरफसे लापरवाही नहीं दिखलाई जा
सकती। जिसकी जैसी शक्ति हो, जिसकी जिस तरफ
अभिरुचि हो उसे अपने लिये वैसा ही कार्य-क्षेत्र चुन
लेना चाहिये। जिसकी जैसी जन्म-जात या भगवत् दत्त
क्षमता है, उसे उसीको विकसित करना चाहिये और
उसे ही देश माताके चरणोंपर अर्पण करना चाहिये।
पिछले बीस वर्षोंमें बंगालमें अनेक साधक, कवि,
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