तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
पृष्ठ 26, कुल 174 में से
संदर्भ में पढ़ेंसौ बातकी एक बात
का शारीरिक बल, साहस, चरित्र बल, ज्ञान और अभि-
ज्ञता बढ़ती है साथ ही साथ व्यवसाय तथा साम्राज्य
बढ़ता है। ब्रिटिश जाति जो इतनी उन्नत है और इतना
बड़ा विशाल साम्राज्य गठित कर सकी है, भ्रमणेच्छा
उसका एक प्रधान कारण है। साम्राज्य प्रतिष्ठाकी
इच्छा न रखते हुए भी विदेश भ्रमणसे हमारा हृदय
विशाल होगा, आत्म विश्वास बढ़ेगा, बुद्धिका विकाश
होगा इसमे किसे सन्देह है ? भू पर्यटनका यदि पूरा
फायदा उठाना हो तो अमेरिकन धनियोंकी तरह विश्व
भ्रमण न कर कुछ कष्ट सहकर पैदल, घोड़े या साइकिल-
पर विश्व भ्रमण करना चाहिये ।
एक अन्य आशाप्रद लक्षण यह है कि सब जिलोंके
युवकोमें चांचल्य पाया जाता है। यह चांचल्य ही जीवन
शक्तिका परिचायक है। तरुणोंमें जीवन आ गया है, वे
अब अपना कर्तव्य समझने लगे हैं, इसी कारण असंख्य
स्थानोंपर युवक समितियोंके अधिवेशन होते दिखलाई
पड़ते हैं। बीच-बीचमें सुना जाता है कि वे काम करनेके
लिये तैयार हैं किन्तु अभी उन्हें ठीक रास्तेका पता
नहीं चलता। नेता न पाने पर और पथ न पहचानने
पर भी युवक जाग पड़े हैं, अपना कर्तव्य और
३८