तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतरुणके स्वप्न
साइकिलपर विश्वभ्रमण करनेमें उत्साह दिखलाने लगा
है। अपरिचित देश देखने, अपरिचितोंसे मिलनेकी जो
व्याकुलता है इसीसे जातिगठन और साम्राज्य सृष्टि
होती है। जो जाति अपनी परिमित सीमाके बाहर नहीं
जाना चाहती उसका पतन अवश्यम्भावी है। दूसरी तरफ
जो जाति बाधा विघ्न पारकर, प्राणोंकी माया त्यागकर,
देश विदेशोंका भ्रमण करती है उसकी दिन दिन शारी-
रिक, मानसिक उन्नति तो होती ही है साथ ही साथ
उसका साम्राज्य भी बढ़ता जाता है। कवि डी० एल०
रायने जिस समय गाया था—"आमार एई देशेते जोन्म,
जेन एई देशेते मोरि", उस समय उन्होंने हमारे सामने
भ्रान्त आदर्श उपस्थित किया था। अब यह कहनेका
समय आया है कि;—
“आमि जाबोना जाबोना, जाबोना घोरे
बाहिर कोरेछे पागल मोरे।”
घरका कोना छोड़कर अब हमें विश्वमें विचरण
करना होगा। अपने देशको भी प्रत्यक्ष रूपसे अच्छी तरह
देखना होगा फिर देशकी सीमा छोड़कर विदेशोंमें भ्रमण
करना होगा तथा अपरिचित देशका आविष्कार करना
होगा। जो जाति इस प्रकारके कार्य कर सकती है उस-
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