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तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 24, कुल 174 में से

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सौ बातकी एक बात
प्रद मालूम होती हैं। (१) व्यायाम चर्चा और भूपर्यटन-
की स्पृहा (२) युवकोंकी जागृति। एक समय बंगाली-
कापुरुष समझा जाता था, वह अपवाद अब नहीं रहा।
जो बंगालीके परम शत्रु हैं वे भी अब उसे बदनाम नहीं
कर सकते। यह बदनामी किसने की थी और कैसे
मिटी यह सब जानते हैं। किन्तु शारीरिक दुर्बलता अभी
भी हैं। इस कमीको दूर करना होगा। हर्ष है कि बंगाली
इस कमीको दूर करनेके लिये बद्धपरिकर हुए हैं और
प्रान्तभरमें समितियां खुल रही हैं। कमजोरीका यह
लांछन यदि हमेशाके लिये मिटाना है तो बंगालीको
राष्ट्रीय दृष्टिसे सबल और वीर्यवान् होना होगा। कुछ
विश्वविजयी पहलवान पैदा करनेसे ही कुछ न होगा।
क्योकि इस तरहके पहलवानोंकी शक्ति और शौर्यसे
राष्ट्रीय गौरवकी वृद्धि होनेपर भी साधारण बंगालीकी
शक्ति नहीं बढ़ेगी। जाति बलवान है या नहीं यह देखने-
के समय उसके दो चार पहलवानोको देखनेसे काम नहीं
चलता, यह भो देखना होता है कि सर्वसाधारणका क्या
हाल है।
बंगालीमे आजकल भ्रमणका शौक बढ़ रहा है यह
सबसे अधिक आनन्दकी बात है। बंगाली तैराकीमे,
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