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तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 23, कुल 174 में से

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पृष्ठ 23

तरुणके स्वप्न


दिया, यह सब न किया जाय तो क्या होगा ? फिर उसके
अविश्वास और अश्रद्धाके भावको लक्ष कर मैंने कहा,
“देखो ! तुम्हारी उम्र मुझसे कम है, आदर्शकी प्रेरणासे
तुमलोग असहयोग आन्दोलनमें आये हो । मेरा आदर्श-
वाद बड़ोंके साथ बढ़ता चला जा रहा है पर तुम्हारा
आदर्श दिन दिन क्षीण हो रहा है।” तब उसने स्वीकार
किया कि पिछले वर्षों'से नाना प्रकारके आघातोंके कारण
उसमे यह भावान्तर हुआ है।
यह अस्वीकार नहीं किया जा सकता कि पिछले
दो वर्षों'से अविश्वास और अश्रद्धाका भाव फैला हुआ
है। इस कारण हमारी कार्यकारी शक्ति लंगड़ी हो गयी
है, किन्तु अब इस जंजालसे अलग होनेका समय आगया
है। अपने भीतरके शत्रुसे बड़ा और शत्रु कौन होगा ?
इसलिये सबसे पहले इस गृहशत्रुको ही भगाना होगा।
तभी हम बाहरके शत्रुपर विजय प्राप्त कर सकेंगे। हमे
दुर्जय आत्मविश्वास प्राप्त करना होगा। हमे आदर्शमे
विश्वास, अपनी शक्तिमे विश्वास, भारतके गौरवमय
भविष्यमें विश्वास करना होगा। इसी विश्वासकी
प्रेरणासे उद्बुद्ध होकर हमें विश्वविजयी बनना होगा।
बंगालकी वर्तमान अवस्था देखनेसे दो बाते आशा-
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