तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें„सौ बातकी एक बात
नीलकण्ठ शिवको आदर्श मान जो व्यक्ति कह सकता
है कि मेरे हृदयमें आनन्दका झरना खुला है, इसीलिये मैं
संसारके सब दुःख कष्टोंको अपने हृदयमें खींचकर रख
सकता हूं, जो व्यक्ति कह सकता है कि मैं सम्पूर्ण यात-
नाओंको भोगनेको तैयार हूं क्योंकि इनसे मुझे सत्यका
आभास होता है, वही व्यक्ति साधनामें सिद्ध हुआ है।
हमें इसी साधनामें सिद्ध होना होगा। जो नवीन
भारतकी सृष्टि करना चाहते हैं, उन्हें सिर्फ देते रहना
पड़ेगा—जीवन भर देते रहना पड़ेगा, अपना सर्वस्व
लुटाकर कंगाल हो जाना होगा, बिना किसी प्रतिदानकी
इच्छा किये। अन्तमें जीवनदान देकर जीवनकी प्रतिष्ठा
करना होगा। जो ऐसे साधक होंगे उनकी सम्पदा होगी
उनका अपना आत्मविश्वास, आदर्शानुराग और आनन्द
बोध।
कुछ दिन हुए छात्र-जीवनके एक बन्धुसे मुलाकात
हुई, उसने मुझसे अनेक निराशा व्यंजक और अविश्वास-
पूर्ण प्रश्न किये। उसके प्रश्नका मर्म यही था कि हमारे
देशका कुछ न होगा। कई प्रश्नका उत्तर पाकर फिर
उसने पूछा, कौंसिलोंमें जाकर, सरकारी कार्यमें अड़ंगा
लगाकर, मंत्रियोंको भगाकर क्या होगा ? मैंने उत्तर
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