तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंदेशबन्धु
काम करवानेकी चेष्टाएं की यह शायद देशवासी नही
जानते । उनके बोए हुए वृक्षमें जब फल आयेगा । तब
देशवासी जानेंगे । जीवन, मरण, शयन, स्वप्नमें उनका
एक ही ध्यान था, एक ही चिन्ता थी, स्वदेश सेवा ।
स्वदेश सेवा ही उनके धर्म जीवनका सोपान था ।
देशबन्धुके जीवनकी बात कहते हुए यदि एक व्यक्ति
का उल्लेख न किया जायगा तो, कुछ न कहा जायगा ।
जो देवी जनसाधारणकी दृष्टिसे तिरोहित मूर्तिमती-
सेवा और शान्तिकी तरह, छायाके समान देशबन्धुके
पार्श्वमें रहतीं, उनको बाद देनेसे देशबन्धुके जीवनमे क्या
बाकी रह जायगा यह कौन कह सकता है ? भोगके
अत्युच्च शिखरपर जिन्होंने हिन्दू रमणीके आदर्श, लज्जा,
नम्रता और सेवाको किसी दिन विस्मृत नहीं किया,
विपत्के महान् अन्धकारमे जिन्होंने पातिव्रत, चित्तस्थैर्य
और भगवद्विश्वासका सहारा न छोड़ा, उन्ही देवीकी
बात लिखते समय मुझे शब्द नहीं मिलते । देशबन्धु तरुणों
के राजा थे और उनकी पतिव्रता साध्वी पत्नी तरुणोंकी
माता । देशबन्धुके देहत्यागके बाद आज वे सिर्फ चिर-
रंजनकी ही माता नहीं हैं, सिर्फ तरुणोंकी ही माता नहीं
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