तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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रह सकता ? उसी तरह वे भी बाधा-विघ्नको तुच्छ सम-
झते थे। किस आधारपर “फारवर्ड” का प्रकाशन और
“कौंसिल-जय” का काम शुरू किया था ! हमलोग असु-
विधा या बाधाकी बात कहते तो वे धमकाकर कहते,
“तुमलोग बिलकुल pessimist हो। वे अक्सर कहते,
“you yong-old man ! तुम असमयवृद्ध युवक ! वे
चिरयुवा, चिरनवीन थे। वे तरुणोंको आशा, आकांक्षा-
को समझते थे। इसीलिये मैंने उन्हें “तरुणोंका राजा”
कहा है।
उनके त्याग, पाण्डित्य, बुद्धि कौशल (tact) की
बातें देशवासी जानते हैं। उनके अलौकिक प्रभावका एक
कारण और कहकर मैं बस करूंगा। मैंने कहा है कि
वैष्णवधर्मकी सहायतासे उन्होंने वास्तव जीवन और
आदर्शके बीचमें एक सामंजस्य स्थापित किया था। वे
अनुभूति द्वारा अपनेको भगवानकी लीलाका यंत्र समझते
थे। उनके अहंकारका लोप हो गया था और अहंकारका
लोप होनेपर मनुष्यमें दिव्य शक्ति आ जाती है। जीवनके
अन्तिम दिनोंमें यह अवस्था थी कि—“यत्र दास महाशय
तत्र जय ।”
उन्होंने कितने तरहके आदमियोंसे कितने तरहके
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