तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंआन्दोलन चलानेके पहले उसे बंगालके उपयुक्त बना लेना
होगा।
जनसाधारणपर ही नहीं पर बड़ों बड़ोंपर उनका
आश्चर्यजनक प्रभाव देखकर सब विस्मय विमुग्ध रहते
थे। किसी किसीने उनके प्रभावका कारण समझनेकी
चेष्टा भी की। उन्होंने जब जिस बातका संकल्प किया,
उसे पूरा किया। “मंत्रं वा साधयेयम् शरीरं वा पातयेयम्”
यही वाणी उनके हृदयपर अंकित थी। वे दुर्वाध विक्रम-
से जिस तरफ जाते, उन्हें कोई रोक नही सकता था।
उस समय वे किसीकी पर्वा नही करते, प्रियजनोंका
आर्त्तनाद और अनुचरोंका करुण स्वर भी उन्हें पथसे
वापिस नहीं ला सकता था। यह दिव्यशक्ति देशबन्धु
ने कहांसे पायी ? यह शक्ति क्या साधना द्वारा मिली थी ?
मैंने पहले ही कहा है कि शक्तिके साधक होनेपर भी
उन्होंने तंत्रानुसार शक्ति साधना नहीं की थी। उनके
प्राण महान् थे ! आकांक्षा भी महान् थी। वे जिस
समय जो चाहते थे उसे प्राणपणसे चाहते और उसे
पानेकेलिये प्राणप्रणसे लग जाते। नेपोलियन बोनापार्टने
अल्पस पहाड़ देखकर जैसे एक समय कहा था, “There
shall be no Alps” मेरे सामने अल्पस पहाड़ खड़ा नहीं
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