सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 17, कुल 174 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 17

तरुणके स्वप्न
ही उस समय उसका दैनिक कर्तव्य हो जाता है और
पुराने जमानेसे चलती आयी परिपाटीकी लकीरको
पीटना ही उसकी नीति हो जाती है। इस अवस्थामें पड़-
कर भी कोई-कोई राष्ट्र फिर जी उठता है—यदि उसके
अस्तित्वकी सार्थकता रहती है। जिस समय अन्धकार-
मय युग आकर राष्ट्रको घेर लेता है, उस समय भी वह
किसी न किसी तरह अपनी शिक्षा दीक्षा और सभ्यताको
बचाये रखता है और अन्य राष्ट्रमें मिलकर अस्तित्व हीन
नहीं हो जाता। इसके बाद भाग्य या भगवानके इंगित
पर फिर नव जागरण होता है, अन्धकार धीरे-धीरे नष्ट
हो जाता है, सुप्त जाति फिर आंखें मलकर उठकर खड़ी
होती है, फिर उसकी सर्जन शक्ति जाग्रत हो जाती है।
सहस्त्र दलकमलकी तरह राष्ट्रके प्राण फिर खिल जाते हैं
तथा वह नवीन रूपसे, नवीन भावोंसे, नवीन नवीन दिशा-
ओंमें आत्मप्रकाश लाभ करता है। इस प्रकारके अनेक जन्म
और मृत्युके बीचमेसे भारतीय जाति होती चली आयी
है। क्योंकि भारतीय जातिका एक mission है, भार-
तीय सभ्यताका एक उद्देश्य है, जो आज भी सफल नहीं
हुआ है।
भारतके इस mission में जिसका विश्वास है,
१६