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तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 16, कुल 174 में से

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सौ बातकी एक बात

इतिहासमें नामोल्लेखके सिवा उसका निदर्शन कहीं नहीं
रहता।
भारतकी कई बार मृत्यु हुई और उसने फिर फिर
नवजीवन लाभ किया, इसका कारण यही है कि भारतके
अस्तित्वकी सार्थकता थी और आज भी है। भारतका
एक सन्देश है जो उसे विश्व परिषदको सुनाना है,
भारतकी शिक्षा ( culture ) में ऐसा कुछ है जो विश्व-
मानवके लिये अत्यन्त प्रयोजनीय है, जिसका ग्रहण किये
बिना विश्व-परिषदका उत्कर्ष नहीं हो सकता। सिर्फ
यही नहीं ; विज्ञान, कला, साहित्य, व्यवसाय, वाणिज्य,
सभी क्षेत्रोंमें हमारा राष्ट्र दुनियाको कुछ देगा, कुछ
सिखायगा। इसीलिये भारतीय मनीषियोंने अन्धकारपूर्ण
युगोंमें भी स्थिर भावसे भारतका ज्ञान दीप जलाये
रखा था। हम उन्हींकी सन्तान हैं,हम क्या अपना राष्ट्रीय
कर्त्तव्य पूरा किये बिना ही मर जायगे ?
मनुष्य देह पञ्च भूतोंमें मिल जानेपर भी आत्मा कभी
नहीं मरती, इसी प्रकार राष्ट्रकी मृत्यु होनेपर भी उसकी
शिक्षा-दीक्षा-सभ्यता रूपी आत्मा अमर है। राष्ट्रकी
सर्जन शक्ति जब लुप्त हो जाय तब समझना होगा कि राष्ट्र
मौतके घाट आ लगा है। आहार, निद्रा, सन्तानोत्पादन

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