सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 166, कुल 174 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 166

देशबन्धु
जेलमें वे अपनी निर्विचार वदान्यताकी आलोचना
सुनकर कहते, “देखो ! तुम समझते हो कि मैं कुछ समझता
नहीं हूं, लोग मुझे ठगकर रुपये ले जाते हैं, किन्तु मैं सब
समझ सकता हूं, मेरा काम दिये जाना है, इसलिये मैं
दिये जाता हूं। विचार करनेका भार जिनके ऊपर है, वे
विचार करेंगे।”
जिस तन्त्रके उपदेशसे बंगालीने शक्ति पूजा सीखी,
उसी तन्त्रके फलस्वरूप देशबन्धु असाधारण तेजस्वी थे ।
निश्चय ही देशबंधुने किसी भी दिन तांत्रिक साधना नहीं
की थी। किन्तु कुलाचार आदिके बिना शक्तिमान नहीं
हुआ जा सकता, इसपर मैं विश्वास नहीं कर सकता। तन्त्र-
का सार शक्ति पूजा है। जगतका मूल आद्या शक्ति है।
जिससे सृष्टि, स्थिति, प्रलय, अथवा ब्रह्मा, विष्णु, महे-
श्वर हैं। उसी आद्या शक्तिके साधक मातृ-रूपमें इसकी
आराधना करते हैं। बंगालीपर तन्त्रका प्रभाव खूब अधिक
है, इसलिये वह मांका अत्यन्त अनुरक्त है। तथा भगवान-
को मातृ-रूपमें मानता है। पृथ्वीकी अन्यान्य जातियां
(यहूदी, अरब, ईसाई आदि) भगवानको पिता रूपमें
देखते हैं। भगिनी निवेदिताके कथनानुसार उस समाजमें
नारीकी अपेक्षा पुरुषका प्राधान्य है इसी लिये वहां बोले
१६५