तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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देशबन्धु
आ गयी। मेरा अभी विश्वास है कि माथुर ,उनके पास
रहता तो उनके व्यक्तित्वके प्रभावसे लोभके वशीभूत
नहीं होता। क्षणिक दुर्बलताके वशीभूत होकर उसने
चोरी की थी, किन्तु मेरा विश्वास है कि वे जीवित रह-
ते तो किस न किसी दिन वह उनके पैरोंपर गिर कर
रोता हुआ माफी मंगता। अब उसकी क्या हालत
होगी सो भगवान जाने। मनुष्य कैसे एक साथ प्रकाण्ड
वैरिस्टर, उदार स्नेही, परम वैष्णव, चतुर राजनीतिज्ञ,
दिग्विजयी वीर हो सकता है। यह प्रश्न स्वभावतः सबके
मनमें उठ सकता है। मैं ने नृ-तत्व विद्याकी सहायतासे
इस प्रश्नका समाधान किया है, पर कृत कार्य हुआ हूं कि
नहीं, नहीं जानता। आर्य, द्रविड़ और मंगोल, इन तीन
जातियोंके सम्मिश्रणसे वर्तमान बंगाली जातिकी उत्पत्ति
हुई है। प्रत्येक जातिमें कुछ गुण विशेष रूपसे विक-
सित होते हैं। इसलिये रक्तका सम्मिश्रण होनेसे गुणों-
का विशेष विकाश होता है, रक्त सम्मिश्रणके फलसे
बंगालीकी प्रतिभा सर्वतोमुखी है। आर्योंकी धर्म-प्रियता
और आदर्शवाद, द्रविणोंकी कला विद्या और भक्तिमत्ता
तथा मंगोलोंका बुद्धि-कौशल और वास्तववाद बंगाल
सागरमे मिल गया है। बंगाली एक साथ ही तीक्ष्ण
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