तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतरुणके स्वप्न
प्रति खिचने लगा। रात या दिनमें जब वह उनके पैर
दबाता तब अपने जीवनकी सब बातें कहता। छूटनेके
समय उन्होंने माथुरसे कहा था कि छूटनेपर मैं तुम्हें
अपने घरपर रखूँगा। माथुर भी इस प्रस्तावसे अपार
आनन्दित हुआ और उसने संकल्प किया कि वह खराब
काम और खराब संगति छोड़ देगा।
माथुरके छुटकारेके दिन देशबन्धुने आदमी भेजकर
उसे अपने घर बुलवा लिया। इसके बाद लगभग तीन
सालतक वह उनके पास रहा। उनके परिचारककी हैसि-
यतसे वह भारतके विभिन्न प्रांतोंमें घूमा था। दागी चोर
होनेके कारण पुलिस कुछ समयतक उसके पीछे लगी
रही, किन्तु जब देखा कि सचमुच वह देशबन्धुके आश्रय-
रहने लगा तब पुलिसने उसका पीछा छोड़ दिया। जमा-
दार प्राय उसे देखकर कहता, "बच्चा ! अब तुम आदमी
हो गये।" मेरा विश्वास था कि माथुरका फिर पतन न
होगा. किन्तु देशबन्धुके देह त्यागके बाद जब पत्र द्वारा
माथुरकी खबर जाननी चाही तो सुना कि जब देशबन्धु
दार्जिलिङ्ग थे, तभी उनके रसारोडवाले मकानसे चांदीकी
कुछ चीजें लेकर वह लापता हो गया। यह अद्भुत समा-
चार पढ़कर मुझे Les Miserables की कहानी याद
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