तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंदेशबन्धु
समय समय पर उन सब बातोंको लेकर हमलोगोंके साथ
आलोचना हुआ करती थी। कौंसिल प्रवेशकी बात
उन्होंने जेलमें ही निश्चिन्त की थी। तथा बहुत कुछ तर्क
वितर्कके बाद हमलोगोने उसका समर्थन किया था।
कौंसिल प्रवेशके प्रस्तावको लेकर उस समय जेलमें
काफी दलादलि हुई थी। दैनिक अंग्रेजी निकालनेका
सङ्कल्प भी हम सबने जेलमे ही किया था। किन्तु दुख है
कि उनके अनेक महान् संकल्प कार्य रूपमें परिणत नहीं
हुए।
जेलकी एक घटनाका उल्लेख किये बिना मैं नहीं रह
सकता। कैदियोंके प्रति उनका प्रेम! हम जिस समय
प्रेसीडेन्सी जेलसे अलीपुर जेलमें आये—उस समय हमारे
वार्डमें माथुर नामका एक कैदी काम करता था। जेलकी
भाषामें जिसे “पुराना चोर” कहते हैं, माथुर वही था।
उसे चोर कहना अन्याय है, वह डाकू था, आठ दस बार
वह जेलखानेमें आ चुका था। तथा डाकूकी तरह ही उस-
का अन्तःकरण खूब सरल था। कुछ दिन काम करनेके
बाद वह देशबन्धुको स्नेह और भक्ति करने लगा। वह
उन्हें बाबा फहने लगा। माथुरके प्रति देशबन्धुके हृदयमें
समवेदना और स्नेह उत्पन्न हुआ। कमश वह हम सबके
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