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तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 159, कुल 174 में से

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पृष्ठ 159

तरुणके स्वप्न
करते थे कि सिर्फ इसीसे हिन्दू-मुसलमानोंमें प्रेम उत्पन्न
हो जायगा। इसीलिये वे शिक्षा (Culture) द्वारा
हिन्दू मुसलमानोंमें मैत्री स्थपित करना चाहते थे। हिंदू
संस्कृति और मुस्लिम संस्कृतिमें कहांपर मेल है, इस
विषयपर वे जेलमें अक्सर मौलाना अकरमखांके साथ
आलोचना किया करते थे। मुझे जहांतक मालूम है
हिन्दू-मुस्लिम सांस्कृतिक मिलनके सम्बन्धमें प्रबन्ध
लिखनेके लिये मौलाना साहब राजी हो गये थे।
भारतमें स्वराज्य होगा वह सिर्फ उच्च श्रेणीके
लोगोंकी स्वार्थसिद्धिके लिये नहीं बल्कि जनसाधारणके
उपकार और मंगलके लिये, इस बातका देशबन्धुने जितने
जोरोंसे प्रचार किया था, प्रथम श्रेणीके अन्य किसी नेता
ने ऐसा किया था; यह मैं नहीं जानता। स्वराज्य जन-
साधारणके लिये है,यह बात कुछ नयी नहीं है। निश्चय,ही
तीस वर्ष पहले स्वामी विवेकानन्दने अपनी “वर्तमान-
भारत” नामक पुस्तकमें इसका उल्लेख किया था, किंतु
स्वामीजीकी भविष्यवाणीकी प्रतिध्वनि उस समय राज-
नीतिके रंगमंचपर सुनायी नहीं पड़ी थी।
जेलसे छूटनेके बाद देशबन्धुने जिन बातोंका प्रचार
किया था, उन्हें उन्होंने जेलमें अच्छी तरह सोच लिया था
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