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तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

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सौ बातकी एक बात
मनुष्य जीवनमें बचपन, यौवन, प्रौढ़त्व और वार्द्धक्य
है, उसी प्रकार राष्ट्रीय जीवनमें भी यही सिलसिला
दिखलाई पड़ता है। मनुष्य मरता है और मृत्युसे निकल
कर नवजीवन लाभ करता है। किन्तु व्यक्ति और राष्ट्रमें
फर्क सिर्फ इतना है कि सब राष्ट्र मृत्युके बाद फिर जी
नहीं उठते। जिस राष्ट्रके अस्तित्वकी कोई सार्थकता नहीं
रह जाती, जिस राष्ट्रके प्राणोंमें कोई तत्व नहीं रह
जाता, वह जाति दुनियासे लोप हो जाती है। अथवा
कीड़ों पतंगोंकी तरह किसी प्रकार जीती रहती है किन्तु
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