तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंदेशबन्धु
में एक दिन भी नहीं रह सकता। तथा मनुष्य या समाज
एक दिन भी नहीं टिक सकता। क्या परिवारमें, क्या
सामाजिक या राजनैतिक जीवनमे, विभिन्न रुचि और
विचारके आदमियोंमे समझौता हुए विना आदमियोंका
एक साथ रहना बिलकुल असंभव है; पृथ्वीके एक प्रांत-
से दूसरे प्रान्तका व्यवसाय वाणिज्य सिर्फ आपसी
समझौतेके बलपर ही चलता है। उनके बीचमे प्रेमकी
गन्ध भी नहीं रहती, यह कहना अत्युक्ति न होगा।
भारतके हिन्दू नेताओंमें इस्लामका इतना बड़ा हिता-
कांक्षी और कोई था, यह मैं नहीं जानता। और वही
देशबन्धु तारकेश्वर सत्याग्रहके सर्वस्व थे। वे हिन्दू धर्म-
को इतना चाहते थे कि उसके लिये प्राणदेनेको तैयार थे।
किन्तु उनके मनमें अहमन्यता नहीं थी, इसीलिये वे इस-
लामको भी चाहते थे। मैं जानना चाहता हूं कितने
हिन्दू नेता हृदयपर हाथ रखकर कह सकते हैं कि वे
मुसलमानसे घृणा नहीं करते? कितने मुस्लिम नेता
हृदयपर हाथ रखकर कह सकते हैं कि हिन्दूसे घृणा नहीं
करते। देशबन्धु धर्ममतकी दृष्टिसे वैष्णव थे, किन्तु
उनके हृदयमे सब धर्मावलम्बियोंकेलिये स्थान था।
पैक्ट द्वारा विवाद मिट जानेपर भी वे यह विश्वास नहीं
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