तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतरुणके स्वप्न
जेलमें देशबन्धु अधिकतर अध्ययनमें लगे रहते।
भारतकी राष्ट्रीयताके सम्बन्धमें पुस्तक लिखनेकेलिये
उन्होंने राजनीति और अर्थ नीतिकी अनेक पुस्तकें
मंगायी थी। सब चीजोंके एकत्र हो जानेपर उन्होंने
पुस्तक लिखना आरम्भ किया था, किन्तु समयकी कमी-
के कारण वे जेलमें पुस्तक सम्पूर्ण नहीं कर सके। जेलसे
बाहर आनेपर कर्मक्षेत्रमें रहनेके कारण वे अपने इस कार्य
की पूर्ति नहीं कर सके। जेलमें राजनीति और साहित्यके
सम्बन्धमें मैंने उनके साथ काफी आलोचना की थी।
उनका विश्वास था कि हमारी राष्ट्रीयता और शिक्षा,
दीक्षाके साथ हमारे समाज तत्व, राजनीति और दर्शनका
भी उद्भव होगा। इसीलिये वे विभिन्न वर्ग और श्रेणीमें
विवाद नहीं चाहते थे और इस विषयमें कार्ल मार्क्सके
विरोधी थे। अन्तिम समयतक उनका विश्वास था कि
भारतके सभी सम्प्रदायों और श्रेणियोंमें पैक्ट हो जायगा
और सब लोग एकमत होकर स्वराज्य आन्दोलनमें योग
देंगे। अनेक लोग उनका मजाक उड़ाकर कहते कि पैक्टसे
वास्तविक संगठन या मिलन नहीं हो सकता क्योंकि मेल
सहानुभूति पर निर्भर करता है, दरमुलाईसे मेल नहीं
होता। वे कहते कि समझौता किये बिना मनुष्य दुनिया-
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