तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंदेशबन्धु
रुपया नहीं चुका सका, इसलिये कर्ज देनेवालेका एटर्नी
आवश्यक लिखा पढ़ी करने उनके पास गया था।
उनके पुत्र चिररंजनसे मालूम हुआ कि यह बात अभी
तक उनके परिवारमें किसीको भी मालूम न थी। तथा
जिसके लिये उन्होंने रुपया उधार लिया था, वह उस
समय लखपति था किन्तु देशबन्धुने उससे कुछ न कह-
कर स्वयं कागजातपर दस्तखत कर दिये। स्त्री पुत्र
आदिको न बतलाकर बहुत-सा फण्ड लेकर उन्होंने
औरोंकी सहायता की थी।
जो देशबन्धुकी निन्दा किये बिना खाना नही खाते,
मैंने उन्हे विपत्तिके समय देशबन्धुका शरणागत देखा है।
इस तरहके एक महाशय एक बार दो सौ रुपयेकेलिये
देशबन्धुके पास आये थे और देशबन्धुने उन्हें चुपचाप
रुपया दे दिया था।
आठ महिनों तक साथ रहनेके कारण उनके हृदयकी
सब बातें और अनुभूति जाननेका मुझे सुयोग मिला था
किन्तु मैंने कभी भी बातचीत, या व्यवहारमें निम्नताका
चिह्न नहीं देखा। राजनिति क्षेत्रमे उनके अनेक शत्रु थे,
यह बात वे जानते भी थे, किन्तु किसीके भी प्रति उनके
मनमे विद्वेष नहीं था। यहां तक कि जरूरत होनेपर वे
उनकी सहायता करनेमें भी कुण्ठित नहीं होते थे।
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