तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतरुणके स्वप्न
था। एक दिन सबेरे उठकर उन्होंने देखा कि गोरखाके
स्थानपर डण्डाधारी उत्तर भारतीय पहरेदार मौजूद है।
उसे देखते ही वे बोले, "क्यों सुभाष ! संगीनकी जगह
यह बांस कहांसे आया ? हम क्या इतने निरीह हैं?"
हंसी दिल्लगीकेलिये उन्हें कुछ सोचना नहीं पड़ता था,
वे स्वभावसेही रसिक थे।
रसबोध होनेपर आदमी प्रतिकूल घटनाओंसे कातर
नहीं होता बल्कि हर अवस्थामें उसका मजा लूट सकता
है। जेलके सुनसान स्थानमें रहनेपर ही इसकी सत्यता
अच्छी तरह अनुभव होती है।
अंग्रेजी और बंगलाके वे प्रकाण्ड पण्डित थे। अंग्रेज
कवियोंमें वे ब्राउनिंगके भक्त थे। ब्राउनिंगकी अनेक
कविताएं उन्हें कण्ठस्थ थीं। जेलमें वे बार-बार ब्राउ-
निंगकी कुछ कविताओंका पाठ किया करते थे। वे रोज
मर्राके काममें दैनिक साहित्यके अध्ययन द्वारा अनेक
मनोरंजक बातोंका जिक्र करते, मगर जब तक वे उनकी
व्याख्या नहीं करते, हम उसका पूरा मजा नहीं उठा
सकते।
देशबन्धुने अपने एक आत्मीयकेलिये ६ रुपये सैकड़े-
पर दस हजार रुपये उधार लिये थे, किन्तु वह समयपर
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