सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 154, कुल 174 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 154

देशबन्धु
शेलोंमें रहा करते थे। तथा दो महिने तक अन्य कई
बन्धुओंके साथ सेन्ट्रल जेलके एक बड़े हालमें थे। इस
समय उनकी सेवाका कुछ भार मेरे ऊपर था। सरका-
रीकी कृपासे आठ महिने तक मैंने उनकी सेवा करनेका
सुयोग पाया था। यह मेरे लिये अत्यन्त गौरवकी
बात है, सन् १६२१ में गिरफ्तार होनेके पहले मैंने सिर्फ
तीन चार महिने उनके अधीन काम किया था। इसलिये
तीन चार मासके कम समयमें उनको अच्छी तरह पह-
चानना मेरे लिये सम्भव नहीं था। पर जब आठ महिने
तक सेवा करनेका सौभाग्य प्राप्त हुआ, तब मैं उन्हें पह-
चान सका। अंग्रेजीमें कहा जाता है कि “Famelia-
rity breeds contempt” यानी विशेष घनिष्ठता होनेसे
अश्रद्धा उत्पन्न होती है। किन्तु देशबन्धुके सम्बन्धमें
कह सकता हूं कि उनके साथ घनिष्ठता होनेपर उनके
प्रति मेरी श्रद्धा सौ गुनी बढ़ गयी। उमीद है इस बातका
सभी समर्थन करेंगे।
देशबन्धु अविरल रसिकताके अपूर्व भण्डार थे, यह
बात जेलमें अच्छी तरह समझ पाया। न जाने कितने
प्रकारके मनोरंजन द्वारा वे सबको आमोदित करते।
प्रेसीडेंसी जेलमें हमारेपर पहरे संगीन धारी गोरखा नियुक्त
१५३