तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंदेशबन्धु
सचमुच क्या धर्मप्रचार, क्या स्वदेश सेवा संघ और
संघानुवर्तिताके बिना कोई भी महान् काम दुनियामें
संभव नहीं है।
और भी एक शिकायत मैंने सुनी है कि राजनीतिके
आवर्तमें पड़कर देशबन्धु शिक्षा-दीक्षामें निम्न आदमियों-
के साथ भी मिलते जुलते थे । सन् १९२१ से जीवनके
अन्तिम समय तक वे जिन सहकर्मियोंके साहचर्यमें आये
थे, उन्हें निम्नस्तरका समझते थे या नहीं, मैं नहीं जानता ।
किन्तु उनकी बातचीतसे कभी इस तरहका भाव प्रकट
नहीं हुआ। मुमकिन है कि वे अपने मनका भाव छिपा लेते
हों । एक घटना मुझे याद है, जेलसे छूटनेपर छात्रोंने
उनके अभिनन्दनकेलिये एक आयोजन किया था, सभामें
उन्हें जो अभिनन्दन दिया गया था, उसमें उनके त्याग
और देशसेवाका उल्लेख था । युवकोंकी भक्ति और
प्रेमका अर्घ्य पाकर उनका हृदय उद्वेलित हो गया । वे
चिरनवीन और चिरयुवा थे, इसीलिये युवककी वाणी
उनके हृदयपर फौरन आघात करती थी । वे जिस समय
अभिनन्दनपत्रका उत्तर देने उठे उस समय उनके हृदयमें
भावोंका तूफान उठ रहा था । अपने त्याग और कष्ट-
की बात भूलकर वे युवकोंके कष्ट और त्यागकी बात कहने
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