तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंदेशबन्धु
थित होकर कहा कि यही तो मुश्किल है कि मैं घृणा
नहीं कर सकता। यही नहीं बल्कि वे बाहरके आदमियों-
से अपने आदमियोंके लिये झगड़ा भी किया करते थे। मैंने
कई बार देखा है कि वे अपने साथियोंका जोरदार सम-
र्थन करते थे और उनकी निन्दाका जोरदार प्रतिवाद
करते थे।
जो भीतरी बात नहीं जानते वे देशबन्धुकी संगठन-
शक्ति देखकर विमोहित थे, मोहित होनेकी बात भी है।
देशबन्धुने जो कुछ कर दिखाया वह भारतकी राजनीति-
में अभूतपूर्व है। मैं निःसंकोच कह सकता हूं कि उन्होंने
पर्वतके समान दृढ़ संगठन किया था, उसके मूलमें अनु-
चर और नायकके प्राणोंका संयोग था। इसके सिवा
दोष गुणकी तरफ ध्यान न देकर मनुष्यमात्रको स्नेह
करनेके भाव और असाधारण बुद्धिकौशल द्वारा वे
भिन्न-भिन्न रुचि और भिन्न-भिन्न पथके लोगोंको एक
साथ चला सकते थे। जो उनके दलमें नहीं थे या उनके
मतका समर्थन नहीं करते थे, वे भी गुपचुप उनकी सहा-
यता करते थे।
अनेक तथाकथित नेताओंने कहा है कि देशबन्धुके
अनुचर और सहकर्मी दासत्वपरायण थे। देशबन्धुके
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