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तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 149, कुल 174 में से

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पृष्ठ 149

तरुणके स्वप्न

सर्वस्व बलिदान करनेकेलिये तैयार रहते थे । देशबन्धु
जानते थे कि अहिंसा संग्राममें अनेक ऐसे अनुचर हैं
जिनका हर अवस्थामें विश्वास किया जा सकता है। मैं
गर्वके साथ कहता हूं कि अन्तिम समय तक उनके अनु-
यायियोंने उनके कहनेके अनुसार हर तरहकी विपत्तियां
और कष्ट सहर्ष सहे ।
दुःखका विषय है कि देशबन्धुके सुसंयत, कर्तव्य-
परायण निर्भीक अनुचरोंको देखकर अनेक तथाकथित
नेता इर्ष्या करते, शायद वे मन ही मन ऐसे सहकर्मी पाने-
केलिये लालायित होते । किन्तु ऐसे कर्मियोंका मूल्य
चुकानेकेलिये वे प्रस्तुत नहीं थे, कमसे कम मेरा तो
यही विचार है । सहकर्मी या अनुचरसे हार्दिक स्नेह
किये बिना बदलेमें उसका हृदय नहीं पाया जा सकता ।
अन्य लोगोंकी तरह उनके अन्दर अपने और पराये-
का भेदभाव नहीं था । उनका मकान सबके लिये खुला
था, यहां तक कि उनके शयन कक्षमें कोई भी जा सकता
था। वे अपने अनुचर वृन्दको प्रेम ही नहीं करते थे बल्कि
उनकेलिये लांछना सहनेकेलिये भी तैयार थे। एक दिन
उनके किसी कुटुम्बीने एक सहकर्मीके किसी कार्यकी
निन्दा कर कहा कि “I hate him” उन्होंने अत्यन्त व्य-
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