तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंदेशबन्धु
अनुचरकी हैसियतसे उसके कारणका निर्देश करना
चाहता हूं। मैंने देखा कि वे मनुष्यके गुण दोषोंकी तरफ
दृष्टि न देकर उसे प्यार कर सकते थे। वे हृदयके सहज
भावसे ही मनुष्य मात्रको स्नेह करते थे, उनका यह
स्वाभाविक स्नेह किसी व्यक्तिके गुणावगुणकी अपेक्षा
नहीं करता था। जिनको हम घृणासे दूर कर देते हैं,
उन्हें वे हृदयसे लगा सकते थे। न जाने कितने तरहके
आदमी उनके पास आते थे और न जाने किन किन क्षेत्रों-
में उनका अपार प्रभाव था। उन्होंने चारों तरफसे जन-
समाजको आकर्षित किया था और उनका पक्ष समर्थन
कर उन्हें विजयी बनाया था। जो उनके अगाध पाण्डित्य-
के सामने नतमस्तक नहीं होते थे, असाधारण वाग्मितासे
वशीभूत नहीं होते थे, अद्भुत भाग्यसे चकित न होते थे,
वे भी उनके महान् हृदय द्वारा आकृष्ट होते थे। तथा
उनके जो साथी थे, वे मानों उनके परिवारके ही आदमी
थे। वे उनके उपकार और मङ्गलकेलिये सब कुछ करते
थे। जीवन दिये बिना जीवन नहीं मिल सकता यह बिल-
कुल सत्य है। उनके सहकर्मी उनके इशारेपर क्या नहीं
कर सकते थे। किसी भी तरहका त्याग, कष्ट, परिश्रम
उन्हें विचलित न कर पाता। उनके इशारेपर सहकर्मी
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