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तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 147, कुल 174 में से

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पृष्ठ 147

तैयार हूं। यहां आनेपर बराबर मेरे मनमें शंका होती
कि कहीं उनकी बात ठीक न निकले, वे भी कहीं यहां न
भेज दिये जायं ? किन्तु हाय इससे भी बढ़कर भयंकर
वज्रपात हुआ। हा ! भारतका भाग्य !
देशबन्धुके साथ मेरी आखिरी मुलाकात अलीपुर
जेलमें हुई थी। आरोग्य लाभ और विश्रामकेलिये वे
शिमला गये थे, मेरी गिरफ्तारीकी बात सुनकर वे फौरन
शिमलासे कलकत्ते आये थे, मुझे देखनेकेलिये वे अलीपुर
मे दो बार आये थे, बहरमपुरको बदली होनेके पहले उनसे
अन्तिम साक्षात् हुआ था। आवश्यक बाते होनेपर मैंने
उनकी चरणधूलि लेकर कहा, शायद आपके साथ बहुत
दिनोंतक मुलाकात न हो। उन्होंने अपने स्वाभाविक
उत्साह और प्रफुल्लताके साथ कहा, “नहीं ! मैं तुम्हें शीघ्र
ही छुड़वा लूंगा।” हाय ! किसे मालूम था कि अब इस
जीवनमें उनके दर्शन नहीं होंगे। उस मुलाकातका प्रत्येक
दृश्य, प्रत्येक बात, चित्रकी तरह मेरे मानस पटलपर
अंकित है, आशा है जीवन भर अंकित रहेगी। उनकी वह
शेष स्मृति ही मेरे जीवनका सम्बल है।
जनतापर देशबन्धुके अद्भुत प्रभावका क्या कारण है ?
बहुतोंने इस प्रश्नका उत्तर देनेका प्रयत्न किया है। मैं