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तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 146, कुल 174 में से

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पृष्ठ 146

देशबन्धु
गम्भीर विवेचनके बाद उनके जीवन और कर्ममय जीवन-
का गूढ़ अर्थ जहांतक समझ सका हूं, वह लिखने पर
एक पुस्तक तैयार हो जायगी। इतनी बातें लिखनेकी
शक्ति और मनकी अनुकूल अवस्था इस समय नहीं है।
इसलिये मित्रके अनुरोधकी रक्षाकेलिये मैं कुछ बातें ही
लिखूंगा।
देशबन्धुके वैचित्र्यपूर्ण जीवनकी सब बातोंसे मैं परि-
चित नहीं हूं। जीवन चरित्रमें जो बातें अबतक छपी हैं,
वे भी सम्भवतः मुझे मालूम नहीं। मैं सिर्फ तीन वर्षतक
उनके पास था। इस समयमें भी कोशिश करनेपर बहुत
कुछ सीख सकता था किन्तु आंखें रहते हुए क्या हम
उनका मूल्य समझते हैं ? खासकर देशबन्धुके सम्बन्धमें
मेरी धारणा थी कि वे और भी कुछ साल रहेंगे और
अपने व्रतका उद्यापन न होने तक कर्मभूमिसे अवसर
ग्रहण न करेंगे। मुझे जहांतक ख्याल है उन्होंने बहुत बार
कहा था कि उनके भाग्यमें दो सालतक समुद्र पार जेलमें
रहना लिखा है। जेलके बाद वे फिर ससम्मान लौटेंगे,
अधिकारियोंके साथ समझौता होगा और वे राजसम्मान
पायेंगे, इसके बाद उनकी मृत्यु होगी। उस समय मैंने
कहा था कि आपके साथ समुद्र पार चलनेकेलिये मैं भी
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