तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंदेशबन्धु
बंगालको कितना चाहता हूं, शायद रवि बाबूने जेलमें
कल्पना कर लिखा था कि,–
सोनार बांग्ला आमि तोमाय भालो बासि
चिर दिन तोमार आकाश तोमार बातास
आमार प्राणे बाजाय बांशी।"
जब क्षणभरकेलिये भी बंगालका विचित्र रूप मानस
चक्षुओंके सामने आ जाता है, तब मनमे होता है, अनु-
भूतिके लिये, इतना कष्ट सहकर माण्डला आना सार्थक
हुआ। पहले कौन जानता था बंगालकी मिट्टी, बंगालका
आकाश, बंगालकी वायु अपने भीतर इतना माधुर्य भरे
हुए है।
क्यों यह पत्र लिख डाला मालूम नहीं। आपको पत्र
लिखूंगा यह बात पहले कभी सोची भी नहीं थी। पर
आपका लेख पढ़कर जो बाते मनमें आयीं उन्हें लिख
डाला। और जब लिख डाला है, तब भेज देना ही ठीक
है। हम सबका प्रणाम ग्रहण करें। इच्छा हो पत्रका उत्तर
दीजियेगा। किन्तु उत्तर पानेकेलिये जोर देनेका अधिकारी
नहीं हूं, शायद उत्तर दें, इसी आशासे ठिकाना दे रहा हूं।
C/o D. I. G. I. B. C. I. D.
13. Elysium Row, Calcutta.
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